याचिका में कहा गया कि 2018 में मुखबिर की सूचना पर दो तेंदुओं और दो बाघों के अंग मिले, जिनकी जांच वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून से कराई गई। इसकी जांच सरकार ने आईएफएस मनोज चंद्रन से कराई, जिसमें 95 प्रतिशत जांच होने पर वन विभाग के कई बड़े अधिकारियों के नाम सामने आए।
इन अधिकारियों को बचाने के लिए सरकार ने मनोज चंद्रन की रिपोर्ट को गलत बताया और इसकी जांच दोबारा एसटीएफ की अधिकारी रिद्धिमा अग्रवाल से कराई जा रही है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि मामले में जांच पूरी हो गई है लेकिन जांच रिपोर्ट पेश नहीं की जा रही है।
कहा कि जांच कमेटी ने अब तक 52 लोगों से पूछताछ की जिनमें सरकारी और कई स्वतंत्र गवाह भी हैं। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 15 अक्टूबर तक जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश करने के निर्देश एसटीएफ की जांच अधिकारी रिद्धिमा अग्रवाल को दिए।