कोर्ट ने पाया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत 2016 में बनाए गए नियमों का पालन नहीं हो रहा है। नगर निगमों, नगर पालिकाओं के पास कूड़ा निस्तारण की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।
नगर पालिका देहरादून, हरिद्वार ने कूड़ा निस्तारण के लिए अभी जगह ही चिह्नित की है और नैनीताल को पर्यावरण मंत्रालय से कूड़ा निस्तारण के लिए अनुमति मिली है। रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य में खुले में कूड़ा फेंका जा रहा है।
87 डंपिंग साइट चिह्नित किए गए हैं, जहां प्रतिदिन 917 टन कूड़ा फेंका जा रहा है। अब तक किसी भी नगर पालिका से कूड़ा निस्तारण के मामले में संतोषजनक रिपोर्ट नहीं मिली है। कोर्ट ने इस मामले को एक जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए तीन अक्तूबर को सुनवाई करना तय किया है।