मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता जय प्रकाश डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2006 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री नवप्रभात, विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल, तीन वन अधिकारियों और कई अन्य लोगों ने साउथ अफ्रीका जाने के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है।
याचिकाकर्ता की ओर से मामले की जांच सीबीआई से कराने मांग की गई थी। इस टूर के लिए वन विभाग ने 20 लाख रुपये दिए। इसमें से करीब सात लाख रुपये खर्च हुए और 13 लाख रुपये शेष दिखाए गए। यह राशि अलग-अलग किस्तों में 2012 तक जमा हुई। कोर्ट ने इस अवधि का ब्याज एक माह के भीतर जमा करने के निर्देश तत्कालीन वन संरक्षक डीबीएस खाती व लेजर होटल के स्वामी को दिए।