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हाईकोर्ट का आदेश, बांडधारी डॉक्टर दुर्गम में करें ज्वाइन, नहीं तो 18 फीसदी ब्याज सहित लौटाएं फीस 

Thu, 01 Aug 2019 08:39 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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- फोटो : फाइल फोटो
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बांड के माध्यम से फीस में रियायत लेकर मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने और फिर बांड की शर्त के मुताबिक दुर्गम क्षेत्र में सेवा करने से कन्नी काटने वाले चिकित्सकों को एकल पीठ से मिली राहत वापस ले ली है।

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खंडपीठ ने ऐसे चिकित्सकों को दुर्गम क्षेत्रों में कार्यभार ग्रहण करने या फीस की छूट का हिस्सा 18 प्रतिशत ब्याज सहित भरने के आदेश  दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने यह फैसला राज्य सरकार की स्पेशल अपील पर दिया, जिसमें एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी।

राज्य सरकार की अपील में कहा गया कि प्रशिक्षित चिकित्सकों ने बांड भरकर फीस में छूट ली और सरकारी योजना का फायदा तो उठाया, लेकिन उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देने की बारी आई तो एकलपीठ से राहत ले ली।

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कोर्ट ने स्पेशल अपील को स्वीकार करते हुए उन चिकित्सकों को कार्यभार ग्रहण करने या 18 प्रतिशत के ब्याज के साथ मूल फीस जमा करने को कहा। चीफ स्टैंडिंग काउंसिल परेश त्रिपाठी ने बताया कि सरकार ने चिकित्सकों के पक्ष के खिलाफ तर्क देते हुए कहा कि उन्होंने बांड की शर्तें प्रवेश के पूर्व प्रोस्पेक्टस और ब्रोशर में दिए थे जिस पर चिकित्सकों ने  हस्ताक्षर भी किए हैं।

उन्होंने कहा कि इन लोगों ने रियायती फीस का फॉर्म भरकर शर्त मानने से बचना चाहा। खंडपीठ के आदेश के बाद अब इन चिकित्सकों को छह माह में ज्वाइनिंग लेटर लेकर सेवा देनी होगी या फीस में ली गई छूट और उस पर 18 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा।
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