हाईकोर्ट ने बद्रीनाथ में महालक्ष्मी मंदिर को 35 हजार रुपये सालाना किराये पर दिए जाने के मामले में मंदिर समिति को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति एनएस धनिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
हरिद्वार निवासी राकेश कौशिक ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि बद्रीनाथ केदारनाथ समिति ने राज्य सरकार की अनुमति लिए बिना ही बद्रीनाथ में स्थित महालक्ष्मी मंदिर को किसी अन्य संस्था को 35 हजार रुपये सालाना किराए पर दे दिया है। संस्था को चरणामृत बेचने की अनुमति भी दे दी गई है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि बद्रीनाथ, केदारनाथ की संपत्ति को बिना राज्य सरकार की अनुमति के किसी को भी हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है। सरकार की ओर से अपने शपथ पत्र में कहा गया है कि मंदिर को किराये पर देने के लिए सरकार ने कोई अनुमति नही दी है।