याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को असंवैधानिक तरीके से आवासों का आवंटन किया गया है। याची ने कहा कि उप्र की पूर्व मुख्यमंत्री आवास आवंटन नियमावली 1997 को उच्चतम न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित कर दिया है। वर्ष 2004 में जारी आवास आवंटन संबंधी शासनादेश भी पूर्व मुख्यमंत्रियों पर लागू नहीं होता है। याची ने कोर्ट से आग्रह किया कि कोर्ट तय बाजार दर पर पूर्व मुख्यमंत्रियों से किराये की धनराशि के वसूल करने के निर्देश जारी करे।
किस पर कितनी राशि बकाया
याचिका में प्रदेश के पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों भगत सिंह कोश्यारी, स्व. नारायण दत्त तिवारी, रमेश पोखरियाल निशंक, भुवन चंद्र खंडूड़ी और विजय बहुगुणा को सरकारी आवास आवंटित किए जाने का मामला उठाया गया है। इन सभी पर कुल 2.85 करोड़ रुपये किराए की राशि बाकी है, जबकि याचिकाकर्ता ने यह राशि 13 करोड़ बताई है। पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी पर 47,57,758 रुपये, स्व. नारायण दत्त तिवारी पर 1,12,98,182 रुपये, रमेश पोखरियाल निशंक पर 40,95,560 रुपये, भुवनचंद्र खंडूड़ी पर 46,59,776 रुपये और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा पर 37,50,638 रुपये की बकाया राशि आंकी गई है।
मैंने कोर्ट में शपथ पत्र दिया है कि मैं 47 लाख रुपये की इतनी बड़ी धनराशि जमा नहीं कर सकता। मेरे पास बैंक में दो-चार लाख रुपये हैं। इतनी बड़ी रकम मैं कहां से दूं। किराए के मकान में रहता हूं। पैसा होता तो अपना मकान बनाता। मेरे पास जब है ही नहीं तो मैं कहां से इतनी भारी भरकम धनराशि का भुगतान करूं। जो करना है करें, मैं तो बकाया देने में असमर्थ हूं।
-भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री