नए भूमि आध्याप्ति अधिनियम की धारा 38(2) के तहत तीन माह के भीतर मुआवजा देने का प्रावधान है। खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा और तीन माह के भीतर संपूर्ण प्रतिकर सहित याची को भुगतान करने का आदेश दिया।
पूर्व में हरिहर लाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसकी भूमि का वर्ष 1980 में उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने अधिग्रहण किया था। 38 वर्ष बीत जाने के बाद भी मुआवजा नहीं दिया गया।
मुआवजे की धनराशि में से आवास विकास परिषद ने मात्र छह करोड़ रुपये ही जमा कराये थे। एकलपीठ ने एसएलओ देहरादून को निर्देश दिए थे कि वे उसकी भूमि का मुआवजा निर्धारित कर उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद से मुआवजा जमा कराएं और आवास विकास परिषद संपूर्ण धनराशि का भुगतान हरिहर को करे।