न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 अक्तूबर की तिथि नियत की है।
पत्र में गौतम ने कहा था कि हिंदू धर्म में अनेक पर्वों पर स्नान, श्राद्ध व अन्य कर्मकांड यहां तक कि अंतिम संस्कार भी गंगा के किनारे किए जाते हैं। विभिन्न नगरों में भारी मात्रा में औद्योगिक कचरा भी इसमें छोड़ा जाता है।
इस सबसे गंगा नदी गंगोत्री से अपने अंतिम छोर गंगासागर तक प्रदूषित है और गंगा का पानी अब आचमन के भी योग्य भी नहीं रह गया है। ऐसी ही स्थिति यमुना नदी की भी है। गौतम ने गंगा व यमुना की निर्मलता के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था।