बता दें कि पतंजलि की दिव्य फार्मेसी ने पिछले मंगलवार को कोरोना की दवा बनाने का दावा किया था। इसके बाद से ही पतंजलि की दवा पर तमाम सवाल उठने लगे थे। आयुष मंत्रालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए पतंजलि को नोटिस भेजकर दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी थी। साथ ही इससे संबंधित दस्तावेज तलब किए थे।
वहीं, बीते बुधवार को उत्तराखंड आयुष विभाग ने भी दिव्य फार्मेसी को नोटिस भेज फार्मेसी को तत्काल कोरोना किट के प्रचार पर रोक लगाने और लेबल संशोधित करने के आदेश दिए थे। नोटिस का जवाब सात दिनों के भीतर देने को कहा गया था। प्रदेश के आयुष विभाग का कहना था कि पतंजलि को इम्युनिटी बूस्टर बनाने का लाइसेंस दिया गया था।
विभाग का कहना था कि दवा बनाने के मामले में आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन मिलने के बाद आयुर्वेद ड्रग्स लाइसेंस अथॉरिटी की एक्सपर्ट कमेटी मामले का परीक्षण करेगी। जिसके बाद ही आयुष विभाग की ओर से फैसला लिया जाएगा।