नैनीताल हाईकोर्ट ने 2016 में बने चकबंदी अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू नहीं करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद प्रदेश के कृषि मंत्री, रानीखेत विधायक और कृषि सचिव को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उत्तराखंड चकबंदी मोर्चा के अध्यक्ष हल्द्वानी निवासी केवलानंद तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश में चकबंदी को लेकर राज्य सरकार ने 2016 में अधिनियम बनाया था जो आज तक प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सका है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि रानीखेत के राजस्व ग्राम भटोडिया कर्चुली के ग्रामीणों ने अपनी भूमि को स्वैछिक रूप से चकबंदी के लिए दे दिया था लेकिन सरकार की ओर से अभी तक उसे अनुमति नहीं दी गई। याचिकाकर्ता सहित ग्रामीणों ने अनुमति लेने के लिए रानीखेत विधायक, कृषि मंत्री, कृषि सचिव समेत कई अधिकारियों से पत्राचार किया लेकिन किसी भी स्तर से इसकी पहल नहीं हो सकी।
याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि चकबंदी के लिए निजी अंग्रेजी समाचार पत्र में भी संबंधित लेख छपा था कि अगर ग्रामीण स्वैछिक रूप से चकबंदी कराते हैं तो उनको सरकार अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराएगी लेकिन रानीखेत के भटोडिया कर्चुली में इसका उल्टा हो रहा है। ग्रामीणों की निजी पहल के बावजूद सरकार चंकबंदी को अनुमति नहीं दे रही है।