उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रभावित पक्ष को सुने बिना अतिक्रमण हटाने के मामले में हरिद्वार के जिलाधिकारी और मुख्य नगर आयुक्त के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है।
बुधवार को हरिद्वार निवासी सुनीता की याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने डीएम और एमएनए के खिलाफ स्वत: संज्ञान लिया और दोनों को चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने पूर्व में एक आदेश पारित कर कहा था कि हरिद्वार में अवैध रूप से बने अतिक्रमण को हटाया जाय। याची सुनीता की शिकायत थी कि जिलाधिकारी और नगर निगम ने इस आदेश की आड़ में नगर निगम की ओर से आवंटित दुकानों को भी अतिक्रमण मानकर उनको दुकान से जबरदस्ती बेदखल कर दिया।
याची के मुताबिक उनके पास इस दुकान को लेकर सिविल न्यायालय का आदेश भी है। इस आदेश में कहा गया है कि पक्ष जाने बिना दुकान से हटाया नहीं जा सकता। खंडपीठ ने जिला अधिकारी हरिद्वार और मुख्य नगर आयुक्त के इस कृत्य को आपराधिक माना। अधिवक्ताओं के मुताबिक आपराधिक अवमानना के मामले में दो साल तक की जेल का प्रावधान भी है।