युवती ने कोर्ट से यह भी कहा कि हरिद्वार के डीएम और एसएसपी को निर्देशित किया जाए कि उन्हें व उनके परिवार को कट्टरपंथियों से होने वाले जान के खतरे से सुरक्षा दिलाई जाए। वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और पंकज पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि जब वे नमाज पढ़ने जाए तो उससे पहले एक प्रार्थना पत्र संबंधित थाने के एसएचओ को दें। एसएचओ उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराएंगे। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।
कोर्ट ने पूछा कि याचिकाकर्ता ने धर्म नहीं बदला है, फिर वह वहां नमाज क्यों पढ़ना चाहती है? युवती ने कहा कि वह हिंदू धर्म की अनुयायी है। पिरान कलियर दौरे के बाद से ही इससे प्रभावित हुई है। वह बिना किसी डर, आर्थिक लाभ, भय या दबाव के पिरान कलियर में इबादत करना चाहती है लेकिन उसे नमाज नहीं पढ़ने दी जा रही है। उसने शादी भी नहीं की है।