हाईकोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की उम्र 62 से 65 वर्ष किए जाने के मामले में हस्तक्षेप करने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 217 में जजों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 62 वर्ष निर्धारित है,। इसमें परिवर्तन करने का अधिकार केवल संसद को है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया और अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि देशभर में लंबित वादों की संख्या बढ़ गई है। ऐसे में हाईकोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की उम्र 62 से 65 वर्ष की जाए। याचिका में कनाडा, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका आदि देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन देशों में जजों की सेवानिवृत्ति की आयु 70 से 75 वर्ष है।
याचिकाकर्ता ने इस संबंध में केंद्र सरकार को भी प्रत्यावेदन दिया है जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पक्षों की सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 217 में जजों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 62 वर्ष निर्धारित है, जिसमें परिवर्तन का अधिकार सिर्फ संसद को है, इसलिए अदालत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।