याचिका में कहा कि इसकी वजह से कई हादसे हो चुके हैं और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में कहा कि बल्लीवाला चौक पर बने फ्लाई ओवर में लोक निर्माण विभाग की ओर से लापरवाही की गई है।
यह फ्लाईओवर भारत सरकार ने फोरलेन में स्वीकृत किया था, लेकिन सरकार ने इसे दो लेन वाला बना दिया है। दो लेन के फ्लाई ओवर में डिवाइडर भी लगा दिए हैं इससे वहां कई हादसे हो चुके हैं।
न्यायालय ने अपने आदेश में मार्च 2019 तक हाईवे का निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन एनएचएआई ने काम पूरा करने के लिए एक साल का लक्ष्य तय किया है। न्यायालय के आदेश के आलोक में उसे पांच महीने में काम पूरा करना होगा। ऐसे में एनएचएआई के सामने हाईवे निर्माण को पूरा करने की कड़ी चुनौती है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनोज पंत के मुताबिक, प्रदेश में 98 पुुल और फ्लाईओवर का निर्माण पूरा करने के न्यायालय ने पूर्व में आदेश दिए थे। इन आदेशों के क्रम में प्रदेश सरकार ने जवाब दिया था कि धन की कमी के कारण इनका निर्माण समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।
सरकार की ओर से ये तर्क भी दिया गया था कि पुलों और फ्लाई ओवर के निर्माण के लिए नाबार्ड धनराशि देता है। लेकिन धनराशि प्राप्त नहीं हो पाई है। इस पर न्यायालय ने नाबार्ड को पुलों और फ्लाईओवर के निर्माण के लिए पर्याप्त मात्रा धनराशि देने के आदेश दिए।