याचिका में कहा गया था कि पूर्व में दायर याचिका में कोर्ट ने विवि की ओर से बढ़ाई गई फीस से संबंधित 2018 के शासनादेश को निरस्त करते हुए बढ़ाई गई फीस छात्रों को वापस करने को कहा था। बावजूद इसके विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें फीस वापस नहीं की गई।
इतना ही नहीं अब भी निरस्त किए शासनादेश के आधार पर ही उनसे फीस ली जा रही है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पतंजलि आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक, प्रिंसिपल और कुल सचिव को अवमानना नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।