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उत्तराखंडः हाईकोर्ट ने बेटी के बच्चों को भी माना स्वतंत्रता सेनानी आश्रित

Sat, 03 Aug 2019 09:36 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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नैनीताल हाईकोर्ट
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नैनीताल हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की बेटी के बच्चों को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित मानते हुए उत्तराखंड विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और भूतपूर्व सैनिक आरक्षण एक्ट के सेक्शन 2 को असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने चंपावत के जिलाधिकारी को आदेश दिया कि यह सुनिश्चित होने पर कि याची के नाना स्वतंत्रता सेनानी थे, याचिकाकर्ता को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित का प्रमाणपत्र दिया जाए।

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वरिष्ठ न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार चंपावत निवासी सावित्री देवी बोरा और उनके बेटे राकेश भूषण ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, विकलांग और भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाला 2 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण उत्तर प्रदेश के एक्ट के अनुरूप लागू है।
 

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संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के खिलाफ बताते हुए याचिका दायर की थी

इस एक्ट में अंग्रेजी में ग्रैंडसन औैर ग्रैंडडॉटर शब्द लिखा है जिसके क्रम में एक्ट के सेक्शन 2 में प्रावधान किया कि विवाहित पुत्री के बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का आश्रित नहीं माना जाएगा। सावित्री देवी बोरा और उनके पुत्र राकेश भूषण बोरा ने इसे लिंग आधारित पक्षपात और संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के खिलाफ बताते हुए याचिका दायर की थी। 

पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इस एक्ट के सेक्शन 2 को असंवैधानिक करार देते हुए चंपावत के जिलाधिकारी को आदेश दिया कि वह याची राकेश भूषण के नाना के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होना सुनिश्चित होने पर राकेश भूषण बोरा को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित का प्रमाणपत्र जारी करें।
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