नैनीताल हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की बेटी के बच्चों को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित मानते हुए उत्तराखंड विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और भूतपूर्व सैनिक आरक्षण एक्ट के सेक्शन 2 को असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने चंपावत के जिलाधिकारी को आदेश दिया कि यह सुनिश्चित होने पर कि याची के नाना स्वतंत्रता सेनानी थे, याचिकाकर्ता को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित का प्रमाणपत्र दिया जाए।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार चंपावत निवासी सावित्री देवी बोरा और उनके बेटे राकेश भूषण ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, विकलांग और भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाला 2 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण उत्तर प्रदेश के एक्ट के अनुरूप लागू है।