विभाग का उनके आवेदन को निरस्त करने का आधार यह था कि इग्नू से डीएलएड केवल उन अभ्यर्थियों का मान्य है जो सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा मित्र के रूप में सेवारत हैं, जबकि पुष्पा बलोदी और दयाल कुमार शिक्षा मित्र नहीं हैं।
उक्त लोगों ने विभाग के इस फैसले को फरवरी 2016 में हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसमें कहा गया था कि उनका दो वर्षीय डीएलएड एनसीटीई से मान्यताप्राप्त है और वे टीईटी पास भी हैं।
उन्होंने मांग की थी कि उन्हें भी शिक्षा मित्रों की तरह सहायक अध्यापक नियुक्ति के लिए योग्य माना जाए। इस पर 1 जून 2018 को एकलपीठ ने उक्त लोगों को योग्य घोषित किया। एकलपीठ के इस निर्णय के खिलाफ सरकार ने खंडपीठ में स्पेशल अपील दायर की थी।