याचिकाकर्ता का कहना था कि शासन ने इस नियमावली में 2018 में संशोधन कर दिया है, जिसमें फॉरेस्ट गार्ड को वन दरोगा के पद पर पदोन्नति के लिए कम से कम 10 वर्ष की सेवा फॉरेस्ट गार्ड के पद पर करनी अनिवार्य होगी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इस विज्ञप्ति के अनुसार वन दरोगा के सभी पदों को सीधी भर्ती से भरा जा रहा है, जो नियमावली के विपरीत है।
याचिका में वन दरोगा के पद पर पदोन्नति के लिए फॉरेस्ट गार्ड के रूप में 10 वर्ष की न्यूनतम सेवा की बाध्यता को भी समाप्त करने की मांग की गई थी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 18 दिसंबर 2019 को जारी विज्ञप्ति पर रोक लगाते हुए सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।