नैनीताल हाईकोर्ट में आज सरकारी अस्पतालों में खुले जन औषधि केंद्रों में लंबे समय से दवाइयों की भारी कमी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इसके बाद कोर्ट ने सचिव औषधि भारत सरकार, औषधि ब्यूरो भारत सरकार, स्वास्थ्य सचिव उत्तराखंड, जिला रेडक्रॉस सोसायटी नैनीताल व राज्य रेडक्रॉस सोसायटी को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि बताएं कि क्या वजह है कि जन औषधि केंद्रों में दवाइयां नहीं आ रही हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी समाजसेवी अमित खोलिया ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि नैनीताल जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में गरीबों को बाजार मूल्य से कम दामों पर जैनरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के मकसद से एक जुलाई 2015 को जन औषधि केंद्र खोले गए थे। रेडक्रॉस सोसायटी को इसका जिम्मा सौंपा गया था। मकसद यह था कि ये केंद्र सुचारु रूप से चलें और आम जन को इसका लाभ मिल सके। लेकिन लंबे समय से इन केंद्रों की हालत इतनी खराब है कि दवाइयां ही उपलब्ध नहीं हैं।
हालत यह है कि कोरोना काल में लोग बाजार से महंगी दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं और जन औषधि केंद्र केवल शोपीस बने हैं। याचिका में कहा कि यहां आई ड्राप के अलावा कुछ भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में केंद्रों का संचालन रेडक्रॉस से हटा कर किसी अन्य संस्था को दिया जाए। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इसे गंभीर मानते हुए औषधि सचिव भारत सरकार, औषधि ब्यूरो भारत सरकार, रेडक्रॉस सोसायटी उत्तराखंड समेत अन्य को तीन सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।