याचिका में कई घोटाले का किया गया है जिक्र
याचिकाकर्ता रविशंकर जोशी ने विजिलेंस और एसआईटी जांच एजेंसियों की ओर से एनएच-74 मुआवजा घोटाला, समाज कल्याण विभाग का छात्रवृत्ति घोटाला, स्वास्थ्य विभाग का एनएचएम दवा खरीद घोटाला आदि का जिक्र करते हुए लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग की है। कहा है कि राज्य की सभी जांच एजेंसी सरकार के अधीन हैं। राज्य में ऐसी कोई भी जांच एजेंसी नहीं जो बिना शासन की पूर्वानुमति किसी राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर सके।
कोई भी एजेंसी मुख्यमंत्री समेत किसी भी जनप्रतिनिधि व लोकसेवक के खिलाफ निष्पक्ष जांच व कार्रवाई नहीं कर सकती। निष्पक्ष जांच वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है जिसका पूरा नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय के पास है। इसी कारण कई बार तो जांच के बीच में ही बिना उचित कारण के पूरी जांच एजेंसी बदल दी जाती है। याचिका में कहा गया है कि प्रतियोगी परीक्षा में हुई धांधली, खनन-भूमि, प्रशासनिक स्तर के भ्रष्टाचार मामलों में निष्पक्ष जांच का कोई उदाहरण नहीं है।