पूर्व में कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि वन विभाग में खाली पड़े 65 प्रतिशत पदों को छह माह में भरें और ग्राम पंचायतों को मजबूत करने के साथ-साथ वर्षभर जंगलों की निगरानी करने को लेकर शपथपत्र पेश करें। कोर्ट के आदेश के क्रम में सरकार की ओर से शपथपत्र पेश किया गया लेकिन इसमें खाली पदों पर पदोन्नति और नई भर्ती का कोई जिक्र नहीं किया गया था। मसलन, कब भर्ती होगी, कितने पदों पर होगी और कितने पद रिक्त हैं आदि। इस पर कोर्ट ने पीसीसीएफ को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं।
यह है मामला
पर्यावरण मित्र अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने पूर्व में हाईकोर्ट के समक्ष प्रदेश के जंगलों में लग रही आग को लेकर मुख्य समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का हवाला पेश किया था। इस पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर राज्य सरकार को वन, वन्यजीव व पर्यावरण को बचाने के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए थे। हाइकोर्ट ने 2016 में भी जंगलों को आग से बचाने के लिए गाइडलाइन जारी की थी। कोर्ट ने जारी दिशानिर्देशों में कहा था कि गांव स्तर से ही आग बुझाने के लिए कमेटियां गठित की जाएं जिस पर आज तक अमल नहीं किया गया। सरकार जहां आग बुझाने के लिए हेलिकॉप्टर का उपयोग कर रही है उसका खर्चा भी अधिक है। इसके बावजूद पूरी तरह से आग नहीं बुझती है।