धौली गंगा सहित उसके आस-पास के जल स्त्रोतों को कितना नुकसान हुआ। कोर्ट ने प्रदूषण बोर्ड को आदेश दिए है कि वह दोबारा से जांच करें कि वहां कितना पर्यावरण को नुकसान हुआ है। इसके लिए जितना भी पैसा लगेगा वे उसका बिल जिलाधिकारी चमोली को दें।
याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में इसकी जांच कराने के लिए वाडिया फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट व ज्युलोजिकल सर्वे आफ इंडिया को पक्षकार बनाने की भी मांग की है। जिस पर कोर्ट ने इनको पक्षकार बनाया है जिससे पता चल सके कि औली बुग्याल है या नही। शादी से वहां पर्यावरण को कितना नुकसान हुआ है इसकी सही जनकारी कोर्ट को मिल सके।
मामले के अनुसार, काशीपुर निवासी अधिवक्ता रक्षित जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड के औली बुग्याल में उद्योगपति के बेटों की शादी 18 से 22 जून तक होने जा रही है जिसमें मेहमानों को लाने ले जाने के लिए करीब 200 हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था की गई और इन हेलीकॉप्टरों से पर्यावरण को खतरा होगा। साथ ही बुग्यालों और क्षेत्र में रहने वाले जंगली जानवरों को भी खतरा होगा।
याचिकाकर्ता का कहना था कि राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट की ओर से दिए गए पूर्व के आदेश की अनदेखी की जा रही है, जिसमें कोर्ट ने पहाड़ी क्षेत्रों बुग्याल आदि में किसी भी प्रकार की गतिविधि में प्रतिबंध लगाया था।