उत्तरकाशी में मासूम की दुराचार के बाद हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को एसआईटी गठित कर चार हफ्ते में जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि बलात्कार के मामलों में कोर्ट के आदेश के बाद भी अभी तक मृत्युदंड का प्रावधान क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को बलात्कार और पाक्सो संबंधी प्रत्येक मामले की प्रतिदिन सुनवाई करने और सरकार से कहा कि ऐसे किसी भी मामले में 48 घंटे के अंदर एसआईटी गठित की जाए।
अमर उजाला में प्रकाशित खबरों का स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने उत्तरकाशी के मामले में कोर्ट में पैरवी के लिए हाईकोर्ट के अधिवक्ता संजय भट्ट और लता नेगी को न्यायमित्र नियुक्त किया।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिया है कि एसआईटी एसएसपी या एसपी के नेतृत्व में गठित की जाए और इसमें सहायक पुलिस अधीक्षक, सीओ, एक महिला इंस्पेक्टर, मनोचिकित्सक , काउंसलर तथा एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता को शामिल किया जाय।
पीठ ने उत्तरकाशी मामले में बालिका के पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया और सोशल मिडिया पर रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने, उसका नाम जाहिर करने तथा उसकी धुंधली तस्वीर दिखाने तक पर सख्ती से रोक लगाने का आदेश दिया है। पीठ ने सरकार को यह भी बताने को कहा कि क्या वह प्रदेश में कृषि भूमि अन्य प्रदेशों के लोगों को बेचे जाने पर रोक लगाने पर विचार कर रही है।