जनहित याचिका में कहा गया था कि सरकार ने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया और अभी तक बूचड़खाना नहीं बनाए हैं। इस कारण उनको करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पूर्व में कोर्ट ने प्रदेश में अवैध रूप से संचालित स्लाटर हाउसों और उनमें बिक रहे मीट की जांच करने के आदेश सभी जिलाधिकारियों को दिए थे और उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा था। रिपोर्ट पेश नहीं करने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए इनको कारण बताओ नोटिस जारी कर सभी को 25 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा था।
बूचड़खाना बंद तो कहां से आ रहा मीट : हाईकोर्ट
वर्ष 2011 में कोर्ट ने प्रदेश में चल रहे अवैध बूचड़ख़ानों को बंद कराने और मानकों के अनुरूप बूचड़खानों का निर्माण करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के विरुद्ध सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई लेकिन अभी तक सरकार को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने 2018 में भी इस संबंध में आदेश दिए तो सरकार ने 72 घंटे में सभी अवैध बूचड़खानों को बंद कर दिया परंतु अभी तक मानकों के अनुरूप कोई बूचड़खाना नहीं बनाया है।
कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब सभी बूचड़खाने बंद हैं तो प्रदेश में मांस कहां से आ रहा है। सरकार की ओर से बताया गया कि बरेली और नोएडा से आपूर्ति हो रही है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की है।