शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान सितंबर के बाद से बैठकों में ही चल रहा है। कई बार टास्क फोर्स के साथ तैयारियों को लेकर बैठकें हुईं, मगर पांच माह में एक भी अतिक्रमण नहीं तोड़ा जा सका। जबकि, पूरे शहर में सैकड़ों जगह नए के साथ-साथ पहले हटाए गए स्थानों पर भी अतिक्रमण बदस्तूर जारी है।
अक्तूबर 2018 में हाईकोर्ट ने वर्ष 1938 की स्थिति के आधार पर अतिक्रमण चिन्हित कर उन्हें ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। इसके बाद प्रशासन ने शहर में सात हजार से ज्यादा अतिक्रमण की पहचान कर उन पर कार्रवाई शुरू की। फरवरी 2019 में करीब 20 दिनों तक अभियान चला, लेकिन इसके बाद चुनावी आचार संहिता के चलते इसे विराम दिया गया। इसके बाद सितंबर 2019 को फिर से लगभग तीन हजार अतिक्रमण ध्वस्त किए गए।
इसके बाद बीते जनवरी को टास्क फोर्स के साथ बैठक की गई थी। बैठके बाद अधिकारियों ने कहा था कि दो-चार दिन के बाद अतिक्रमण हटाने के लिए टास्क फोर्स को शहर में उतारा जाएगा। लेकिन, अभी तक टीम की तैयारियां ही पूरी नहीं हुई हैं। एक अधिकारी के अनुसार अभी तक अतिक्रमण हटाने के लिए ऊपर से आदेश नहीं आए हैं। अब ये ऊपर वाले कौन हैं यह तो अधिकारियों को ही पता हो सकता है। मगर, अब सच्चाई ये है कि इस ढिलाई की आड़ में नई पुरानी हर जगह अतिक्रमण नजर आ रहा है।
कैनाल और त्यागी रोड पर अतिक्रमण की पहचान और ध्वस्तीकरण के लिए अलग से समिति गठित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके साथ ही प्रेमनगर में दोबारा से किए गए अतिक्रमण पर भी नजर रखने को कहा गया है। इसमें त्यागी रोड के लिए समिति का गठन कर भी लिया गया था। लेकिन, अभी तक रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है।
1000 से ज्यादा जगह दोबारा अतिक्रमण
सितंबर माह में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पुरानों की भी स्थिति जांची गई थी। इस दौरान पाया गया था कि जिन जगहों से फरवरी में अतिक्रमण हटाया गया था वहां लगभग 1000 जगह दोबारा से अतिक्रमण किया गया है। ऐसे में उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश पिछले जिलाधिकारी ने दिए थे।
मैं टास्क फोर्स के साथ जल्द बैठक करूंगा। पिछली बैठक की कार्रवाई कहां तक पूरी हुई है, कितना काम कहां हुआ है और कहां पर जल्द किए जाने की जरूरत है। इन सबकी समीक्षा की जाएगी। जल्द ही अभियान फिर से शुरू किया जाएगा।
- डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव, जिलाधिकारी देहरादून