सेवाओं में कमी के आधार पर स्वास्थ्य महानिदेशालय ने कुछ समय पूर्व जिस कंपनी शील नर्सिंग होम का अनुबंध निरस्त किया था, उस पर स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी मेहरबान हैं।
मंत्री ने स्वास्थ्य महानिदेशक डा. कुसुम नरियाल को कंपनी को दोबारा काम देने के निर्देश दे दिए हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक ने गेंद शासन के पाले में डालते हुए दिशा-निर्देश मांगे हैं। दरअसल कुछ समय पूर्व स्वास्थ्य विभाग ने दो कंपनियों से 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के पीपीपी मोड में संचालन के लिए अनुबंध किया। इसमें से शील नर्सिंग होम को चौखुटिया, लोहाघाट, बाजपुर, गैरसैण, जखोली, गरमपानी, कपकोट और मुनस्यारी सीएचसी का संचालन दिया गया।
वहीं राजभ्रा मेडिकेयर को रायपुर, सहिया, थत्यूड और नैनबाग सीएचसी की जिम्मेदारी दी गई। दोनों कंपनियों को अनुबंध के अनुसार अस्पताल में सेवाएं, सुविधाएं और डॉक्टर समेत अन्य स्टाफ रखने थे। हालांकि कई तरह की अनियमितताओं के चलते विभाग ने राजभ्रा मेडिकेयर का अनुबंध निरस्त कर दिया।
वहीं कुछ समय पूर्व सेवाओं में कमी और लोगों के विरोध के चलते विभाग ने लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को शील नर्सिंग होम से वापस ले लिया। साथ ही अन्य दो सीएचसी लोहाघाट और बाजपुर का अनुबंध भी निरस्त कर दिया, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को विभाग का यह नियम रास नहीं आया।
उन्होंने स्वास्थ्य महानिदेशक डा. कुसुम नरियाल को कंपनी को काम सौंपने को कहा है। अब मंत्री के निर्देश मिलने के बाद डीजी असमंजस में हैं। बीच का रास्ता निकालते हुए उन्होंने शासन से दिशा-निर्देश मांगे हैं। स्वास्थ्य मंत्री का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन किया गया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। उनका पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।
डीजी पर बढ़ा दबाव
सूत्रों के अनुसार इस मामले में कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक पर दबाव बहुत अधिक बढ़ गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने डीजी को व्यक्तिगत रूप से फोन कर भी कार्रवाई के लिए कहा है। जिस पर डीजी ने शासन को मामला फॉरवर्ड कर दिया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने शील नर्सिंग होम को काम देने को कहा है। हम कंपनी को लीगली टर्मिनेट कर चुके हैं। यह बात हम मंत्री को भी बता चुके हैं। उसके बावजूद मंत्री ने उन्हें काम देने के निर्देश दिए हैं, जिस पर शासन से दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।
- डा. कुसुम नरियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक