मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़
प्राधिकरण ने माना कि यह और भी गंभीर मामला है। लगता है कि गलत तरीके से मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हुए ऑपरेशन किए गए हैं। नियमानुसार डॉ. रावत का नाम प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराए गए पोर्टल पर पंजीकृत होना चाहिए था जो कि नहीं था। डॉ. रावत ने लिखित रूप से बताया कि जो भी क्लेम किए गए हैं, उनमें न तो उनकी हैंडराइटिंग है और न ही हस्ताक्षर।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने कालिंदी अस्पताल की सूचीबद्धता तत्काल समाप्त करते हुए उसका इंपेनलमेंट खत्म कर दिया है। अब यहां प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना और राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत निशुल्क इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी। प्राधिकरण के अपर निदेशक अतुल जोशी की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ अलग से विधिक कार्रवाई की जाएगी।