अदालत ने दो नवंबर 2012 को सभी अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए। उसके बाद से अभियोजन पक्ष ने कुल 26 गवाहों के बयान करवाए जबकि बचाव पक्ष ने पांच गवाह पेश किए।
अदालत ने सभी छह अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाया। अभियुक्त माखन सिंह नेगी, कलाम सिंह नेगी, संजय कुमार, आरसी आर्य और मीना आर्य को एक साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई।