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उत्तराखंड: सरकार ने फिर चला बेनामी संपत्ति पर सियासी दांव 

Tue, 29 Nov 2016 03:38 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत - फोटो : Self
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विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही बेनामी संपत्ति के खिलाफ मुख्यमंत्री हरीश रावत एक बार फिर एक्शन में आते दिख रहे हैं। उन्होंने शासन के अफसरों को बेनामी सौदे की जांच कर एक सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। दिलचस्प यह है कि इससे पहले भी वह कई बार भूमाफिया और बेनामी संपत्ति जुटाने वालों पर शिकंजा कसने की हिदायत दे चुके हैं, लेकिन इन हिदायतों के बावजूद न तो कोई एक्शन हुआ न ही सरकार ऐसा कुछ करती दिखाई दी।
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हैरानी की बात यह है कि कैबिनेट ने जमीनों के सौदों की जांच को लेकर राजस्व मंत्री यशपाल आर्य की अध्यक्षता में तीन मंत्रियों की समिति बनाई थी, उसकी भी आज तक कोई बैठक नहीं हो पाई है। अलबत्ता सीएम की ओर से हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से भू-सौदों की जांच कराने के सिर्फ बातें ही होती रही हैं।

प्रदेश में सरकारी जमीनों के आवंटन का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। इस विवाद की वजह अंतरिम सरकार में सामाजिक गतिविधियों के नाम बेशकीमती भूमि का अंधाधुंध आवंटन था। तत्कालीन नित्यानंद स्वामी सरकार पर ये आरोप लगा कि उसने करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव बांट दी। इन जमीनों से राजनेताओं, संतों, उद्यमियों के नाम जुड़े हैं।
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समय-समय पर भूमि घोटालों के आरोप गरमाते रहे। सत्ता की बाग़डोर हाथों में आते ही मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सबसे पहले भूमाफिया पर शिकंजा कसने का एलान किया। उन्होंने इसके लिए अलग से एसआईटी गठन के भी निर्देश दिए। लेकिन राजकाज में रम गए मुखिया की ओर से एक्शन का इंतजार होता रहा।
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अब तक हवा हवाई साबित हुए सीएम के दावे

किशोर उपाध्याय - फोटो : file photo
यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में तब आया जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने 1990 से लेकर अब तक आवंटित सरकारी भूमि की जांच की मांग की। इस मांग को लेकर कांग्रेस ने राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा।

सियासी हालातों ने जब करवट बदली तो कैबिनेट में राजस्व मंत्री यशपाल आर्य की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय समिति के गठन का निर्णय लिया गया। वन मंत्री दिनेश अग्रवाल और पर्यटन मंत्री दिनेश धनै समिति में सदस्य हैं।

हैरानी वाली बात है कि इस कमेटी की अब तक एक भी बैठक नहीं हो पाई है। पूछने पर ‘अमर उजाला‘से कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि कमेटी की बैठक हुई कि नहीं इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्हें अभी किसी बैठक में नहीं बुलाया गया है।

यही नहीं सीएम के बार-बार दावे के बावजूद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का एलान हुआ। लेकिन ये कमेटी भी आज तक अस्तित्व में नहीं आ पाई। अलबत्ता मुख्यमंत्री ने उन संस्थाओं और लोगों के नामों की एक सूची जरूर जारी की, जिन्हें सरकारी भूमि आवंटित की गई थी। लेकिन इसके बाद दूसरी कोई सूची जारी नहीं हुई। 

हरक पर कसा शिकंजा
बेनामी संपत्ति के मामले में पूर्व कैबिनेट डॉ. हरक सिंह रावत पर जरूर शिकंजा कसने की कोशिश हुई। उन पर सहसपुर के शंकरपुर में करीब 107 बीघा भूमि कथिततौर पर फर्जी तरीके से अपने नाम करने का आरोप है। एसआईटी इस प्रकरण की जांच कर रही है। एसआईटी से ओनिडा फैक्ट्री अग्निकांड और गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन की जांच कराई जानी थी।
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जमीनों की जांच कराओ, कौन रोकता है: भट्ट

ajay bhatt - फोटो : amar ujala
‘सीएम बार-बार कहते हैं कि पोल खोल दूंगा, लेकिन करते कुछ नहीं। जमीनों की जांच कराओ, कौन रोकता है। लेकिन कहने भर से कुछ नहीं होता।’
-अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा।

‘समिति के अध्यक्ष ही बैठक बुलाता है। बैठक होती तो उन्हें बुलाया जाता। उन्हें अभी तक समिति की ऐसी किसी बैठक की जानकारी नहीं है।’
-दिनेश अग्रवाल, मंत्रिमंडलीय उपससमिति के सदस्य।

‘मसला उठाने के बाद सरकार ने होमवर्क किया। सीएम ने एक सूची भी जारी की। उसके बाद क्या हुआ, इससे अनभिज्ञ हूं। सरकार से प्रगति के बारे में जानकारी लूंगा।’
- किशोर उपाध्याय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

सर्वाधिक बेनामी सौदे और सरकारी भूमि का अंधाधुंध आवंटन भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुआ है। कांग्रेस सरकार ने उसपर नकेल कसी है। सरकार ने मंत्रियों की जो कमेटी गठित की है, उसकी बैठक जल्द होने जा रही है। 
-सुरेंद्र अग्रवाल, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार
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