उन्होंने कहा कि बंदर पकड़ने के लिए विभाग अभी तक वृंदावन और मथुरा की टीमों पर निर्भर है। उन्हें एक बंदर पकड़ने का 300 से 400 रुपये देना पड़ता है। यह काफी महंगा पड़ता है। विभाग अब तक 14,000 बंदर पकड़ चुका है, लेकिन 500 की ही फेमिली प्लानिंग हो पाई है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान निकालना होगा। लेकिन अब वन पंचायतों की मदद से बंदरों को पकड़ने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए वन पंचायतों को फंड दिया जाएगा और वहां विभाग की ओर से बंदरों को पकड़ने की ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू होंगे।
कहां खो गई मुख्यमंत्री की घोषणा
हर जनपद में बंदरों के बाड़े बनाए जाने की मुख्यमंत्री की घोषणा के जवाब में जब वन मंत्री ने कहा कि ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई, तो भाजपा विधायक चंदनराम दास ने बताया कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की थी। मंत्री का कहना था कि उन्होंने मुख्यमंत्री घोषणा प्रकोष्ठ और विभाग से जो जानकारी ली, उसमें इस घोषणा का जिक्र नहीं था। अब ऐसे यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि यदि चंदनराम दास सही हैं तो मुख्यमंत्री की घोषणा कहां खो गई?
हरक जी, आप पर उम्र लागू नहीं होती
एक प्रश्न का उत्तर देने से पहले वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने भाजपा विधायक चंदन रामदास को उनके प्रश्न पर यह कहकर चुटकी ली कि उम्र का तो ख्याल रखा करो यार। चंदन रामदास भी कहां चुप रहने वाले थे, उन्होंने भी उसी चुटीले अंदाज में जवाब दागा, आपके लिए उम्र लागू नहीं होती, पता है न! उनकी इस हाजिरजवाबी से सभा मंडप ठहाकों से गूंज उठा।