कौशिक ने कहा कि कानूनी समस्या का समाधान करने के लिए अगर जरूरत पड़ेगी तो संबंधित कानूनों में संशोधन किया जाएगा या फिर अध्यादेश लाया जाएगा। सरकार हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए भी तैयार है।
इस मामले का एक पेचीदा मामला हर की पैड़ी से होकर बह रही गंगा के किनारे होटल, आश्रम आदि के निर्माण का भी है। एनजीटी का साफ आदेश था कि गंगा के किनारों के 200 मीटर के दायरे में निर्माण को हटाया जाए। हरीश रावत की सरकार ने इस निर्माण को बचाने के लिए ही गंगा की धारा को नहर घोषित किया था। इसी के लिए हरीश रावत ने अब संतों के बीच पहुंचकर माफी मांगी और कहा कि सरकार चाहे तो उनका यह फैसला पलट दे।
हर की पैड़ी से होकर बहने वाली नदी गंगा की धारा थी, अब भी है और आगे भी रहेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का साफ कहना है कि इसे गंगा की धारा घोषित किया जाए। आज इसका फैसला कर लिया गया है।
-मदन कौशिक, संसदीय कार्यमंत्री उत्तराखंड