निजी अस्पतालों में तालाबंदी होने के कारण मरीजों की दिक्कत बनी हुई है। शहर के ज्यादातर छोटे-बड़े अस्पताल इस तालाबंदी में शामिल हैं। इसके कारण मरीजों को सरकारी या अन्य निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। आईएमए की ओर से पिछले कुछ दिनों से दून अस्पताल के बाहर मुफ्त ओपीडी लगाकर मरीजों की जांच की जा रही थी। बृहस्पतिवार को यह ओपीडी भी बंद रही। आईएमए दून शाखा अध्यक्ष डा. संजय गोयल ने बताया कि आईएमए हॉल में मुफ्त ओपीडी लगाई जा रही है।
हमने बुधवार को 66 और बृहस्पतिवार को 15 अस्पताल व क्लीनिक को नोटिस जारी किए हैं। उन सभी को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण कराने को कहा गया है। जो एक्ट के तहत पंजीकरण नहीं कराएंगे, उन्हें सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
- डा. एसके गुप्ता, सीएमओ, देहरादून
वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत आवासीय क्षेत्रों में चल रहे अस्पताल- क्लीनिक के लिए कंपाउंडिंग की व्यवस्था है। हमने 49 अस्पताल- क्लीनिक में नोटिस चस्पा कर मानकों के अनुसार कंपाउंडिंग करने को कहा है। कंपाउंडिंग न करने और मानकों का पालन न करने वालों को सील किया जाएगा।
- पीसी दुम्का, सचिव, एमडीडीए
एमडीडीए और स्वास्थ्य विभाग ने हमें नोटिस जारी किए हैं। 450 वर्ग मीटर भूमि का मानक पूरी तरह गलत है। जो अस्पताल वर्षों पहले से चल रहे हैं, वह नए मानकों पर फिट कैसे बैठेंगे। सरकार हमारे भवनों को रेगुलराइज करे तभी हम अस्पतालों का संचालन कर पाएंगे।
- डा. संजय गोयल, अध्यक्ष, आईएमए दून
क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में हड़ताल पर गए निजी डॉक्टरों के पक्ष में कांग्रेस ने सदन में सरकार को घेरा और जायज मांगों को मानने के लिए दबाव बनाया। सरकार ने साफ किया कि वार्ता के लिए दरवाजे खुले हैं। लेकिन एक्ट की परिधि से बाहर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। विपक्ष का आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं, मरीज इलाज के लिए पड़ोसी राज्यों में जाने को मजबूर हैं। सरकार की दलीलों से असहमत विपक्ष ने सांकेतिक वॉक आउट कर अपना विरोध दर्ज करवाया।
कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने निजी डॉक्टरों की हड़ताल से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा एक प्रस्ताव के जरिए सदन में उठाया। काजी ने कहा कि 80 प्रतिशत मरीज निजी अस्पतालों में इलाज करवाते हैं। सरकार के क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में सुधार के लिए आईएएम और निजी प्राइवेट डॉक्टरों की मांग को दरकिनार करने से यह स्थिति पैदा हुई है।
मरीज इलाज के लिए सीमावर्ती जनपदों सहारनपुर, बिजनौर, बुलंदशहर और मेरठ जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हड़ताल पर गए निजी डॉक्टरों को धमकाया जा रहा है। विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि आईएमए के सुझाव का सरकार ने संज्ञान नहीं लिया। अगर एक्ट की नियमावली में संशोधन राज्य सरकार की परिधि में है तो उसे बदला जाना चाहिए। इसका जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि एक्ट 2010 में अधिसूचित हुआ और इसे 2015 में लागू किया गया। सरलीकरण के लिए आईएमए के सुझावों को माना गया।
प्राधिकरणों में वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी इसी वजह से ही लाई गई। पंत ने दावा जताया कि हड़ताल में बड़े निजी अस्पताल शामिल नहीं हैं। इससे मरीजों को इलाज में दिक्कतें नहीं आ रही हैं। पंत ने कहा कि अगर आईएमए को कोई और सुधार चाहिए तो सरकार से वार्ता करे। डॉक्टर हठधर्मिता छोड़ें। रास्ता केवल वार्ता से निकलेगा। सरकार एक्ट से बंधी है और तय मानकों के अनुरूप रास्ता निकलेगा। विपक्ष ने इस पर अपनी असहमति जताई और हंगामा करते हुए सदन से वॉक आउट कर दिया।