विधानसभा चुनाव को करीब आता देख उत्तराखंड सरकार पर सियासी दबाव बनाने के लिए कई महकमों के कर्मचारी आंदोलन की राह पर चल पड़े हैं।
साढ़े चार लाख के करीब सरकारी, संविदा और आउट सोर्स पर लगे कर्मचारियों के आंदोलनों को झेलना सरकार की मजबूरी बन गई है। हालांकि हर चुनाव से पहले कर्मचारी आंदोलन चरम पर होते हैं, लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा चिंताजनक हैं। लगभग एक लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी इस समय सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
आम आदमी रोजाना की हड़तालों से परेशान है। लेकिन ये कर्मचारी संगठन अपने भारी संख्याबल को हथियार बनाकर सरकार को बैकफुट पर लाने का दबाव बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ की कई मांगों पर सरकार सहमति जता चुकी है। लेकिन वे बिना शासनादेश मानने को तैयार नहीं।
उधर, अब 27 हजार प्राथमिक शिक्षक भी सोमवार से बड़ा आंदोलन शुरू करने वाले हैं। अगर सितंबर माह की बात करें तो राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, वाणिज्य कर्मचारी, एएनएम, रोडवेज कर्मचारी, उपनल सहित तमाम संगठन इस माह आंदोलन कर चुके हैं। कुछ आश्वासनों से माने तो कुछ बड़े आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे हैं। सरकार का कर्मचारियों के प्रति नरम रवैया भी इनके मनोबल को बनाए हुए है।
20 प्रतिशत आबादी को करते हैं प्रभावित
सरकारी महकमों, निगमों, निकायों में तैनात नियमित, संविदा, आउटसोर्र्सिंग कर्मचारियों की संख्या प्रदेश की 20 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करती है। इतनी बड़ी आबादी के सरकारी कर्मचारियों से सीधा जुडे़ होने के चलते हर सरकार इनके आंदोलनों के खिलाफ कभी सख्त रुख अपनाती नहीं दिखी और इसी का फायदा कर्मचारी संगठन उठा रहे हैं।