ऐसे आएगी पारदर्शिता
बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण से एक व्यक्ति के कई बार आवेदन की संभावना खत्म होगी। इससे धोखाधड़ी और पहचान की चोरी की संभावना कम होगी। बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण के लिए छात्रों को अपने दस्तावेजों के साथ संस्थान में जाना होगा। जो छात्र प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को पूरा कर लेंगे उन्हें उनके बैंक खाते में छात्रवृत्ति राशि मिल जाएगी।
ऐसा भी होता रहा है कि प्रधानाचार्य या प्राचार्य छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति के लिए हस्ताक्षर कर देते हैं, लेकिन किसी मामले में गड़बड़ी पर इससे इन्कार कर देते हैं। ऐसा न हो इसके लिए प्रधानाचार्य पहले अधिकृत होने का प्रमाण देंगे। जिनके बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही वह छात्रवृत्ति की सूची अनुमोदित कर सकेंगे।
- गीताराम नौटियाल, निदेशक, समाज कल्याण विभाग