रेखा आर्य का कहना है कि नियमानुसार बाल सुधार गृहों में रहने वाले बच्चों को 18 साल पूरी करने के बाद नहीं रखा जा सकता। अब ऐसी व्यवस्था की जाएगी, जिसमें ऐसे बच्चों का घर सदन ही माना जाए और अधीक्षिका और जिलाधिकारी को उनका परिजन माना जाए, ताकि यदि वो किसी भी नौकरी के लिए आवेदन करें तो उनकी अपनी पहचान हो।
बताया कि सरकार ऐसे युवाओं को प्रशिक्षित कर देश के विकास में भागीदार बनाएगी। साथ ही आफ्टर होम पीआरडी, उपनल से मार्गदर्शन दिलाया जाएगा। जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल हो सकेगा।
बता दें प्रदेश में 46 बाल सुधार गृह हैं। जिसमें सात बाल सुधार गृह स्वयंसेवी संस्थाएं संचालित करती हैं। बाकी का संचालन बाल विकास विभाग करता है। यदि कैबिनेट में यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो इससे काफी बच्चों का भविष्य संवर जाएगा। वर्तमान में प्रदेशभर में ऐसे 15 अनाथ बच्चे हैं जो 18 साल की आयु पूरी कर चुके हैं।