उत्तराखंड में आपदा में हुए संपत्ति के नुकसान की इस बार भी एक लाख रुपये तक की भरपाई हो पाएगी। तस्वीर का दूसरा रुख यह भी है कि इसी नुकसान की भरपाई के लिए निजी क्षेत्र नौ लाख रुपये तक देने को तैयार है।
फर्क है तो सिर्फ इतना कि निजी क्षेत्र से नुकसान की भरपाई करने के लिए प्रभावित पक्ष को अपनी तरफ से कुछ खर्च भी करना होगा। केदारनाथ की आपदा के बाद बीमा क्षेत्र को इस सेक्टर में लाने की कोशिश की भी गई थी पर तीन साल में यह पाठ पूरी तरह से भुला दिया गया।
केदारनाथ की आपदा के तीन साल बाद भी प्रदेश में आपदा के बाद नुकसान की भरपाई का मामला नाममात्र की सरकारी इमदाद पर ही निर्भर है। प्रभावित लोग साफ कह रहे हैं कि यह इमदाद पर्याप्त नहीं है। आपदा प्रबंधन विभाग भी यह स्वीकार कर रहा है पर उसका कहना है कि आपदा राहत के 2015 के संशोधित मानकों के कारण तस्वीर कुछ हद तक बदल गई है। घर की पूर्ण क्षति होने पर अब एक लाख रुपये तक के मुआवजे का प्रावधान कर दिया गया है। पहले यह 50 हजार रुपये ही दिया जाता था।
यह तब है जबकि इसी नुकसान की भरपाई निजी क्षेत्र करीब नौ गुना अधिक मदद करने को तैयार है। बीमा क्षेत्र से जुड़े लोगों के मुताबिक वर्तमान में पांच रुपये प्रतिदिन की मामूली रकम से नौ लाख रुपये तक का बीमा कवर पाया जा सकता है। हालांकि भूकंप, बाढ़ आदि के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में प्रीमियम अधिक होगा।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव और वित्त्त सलाहकार इंदु कुमार पांडे के मुताबिक निजी बीमा कंपनियों को इस क्षेत्र में लाने के लिए पूर्व में कोशिश भी की गई थी। योजना यह थी कि सरकार प्रीमियम का कुछ भार वहन कर ले। ऐसे में आपदा के समय प्रभावितों के नुकसान की बहुत हद तक भरपाई हो पाती। यह योजना फिलहाल परवान नहीं चढ़ पाई।
आपदा में कितनी है सरकारी राहत
घर की पूर्ण क्षति-पर्वतीय क्षेत्रों में करीब एक लाख रुपये, मैदानी क्षेत्रों में 95 हजार रुपये
पक्के मकान की आंशिक क्षति-5200 रुपये प्रति मकान
झोपड़ी- 4100 रुपये प्रति इकाई
गौशाला-2100 रुपये
निजी क्षेत्र की यह है स्थिति
एक हजार वर्ग फुट पर बने मकान की निर्माण लागत अगर 1500 रुपये प्रति वर्ग मीटर मानी जाये तो पांच रुपये प्रति दिन के प्रीमियम पर नौ से 15 लाख रुपये तक का संपत्ति बीमा
मानसून से पहले आपदा की दस्तक
यह तब है जबकि मानसून की दस्तक से पहले ही कुमाऊं में बादल फटने और इससे खासा नुकसान होना आम होता जा रहा है। नैनीताल के बगड़ गांव में ही सोमवार को बादल फटने से खासा नुकसान हुआ। सोमवार को ही नैनीताल के आसपास क्षेत्र में बादल फटने से लोगों को खासा नुकसान उठाना पड़ा। इससे पहले बागेश्वर और अल्मोड़ा में भी बादल फटने से घर, खेत, खलिहान मलबे से अटने के मामले सामने आ रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून केजून के अंतिम सप्ताह तक यहां पहुंचने की संभावना है।
क्या कवर दे रहा है बीमा क्षेत्र
-भूकंप, बाढ़, बिजली गिरना, भूस्खलन
-अपना मकान न होने पर घर की संपत्ति का बीमा
-अधिकतर बीमा कंपनियां घर की निर्माण लागत का ध्यान रखती हैं, न की उसके बाजार मूल्य का
केदारनाथ आपदा के दौरान तीन हजार करोड़ रुपये तक का था क्लेम
केदारनाथ आपदा के समय प्रदेश में बीमा कंपनियों ने करीब तीन हजार करोड़ रुपये तक का क्लेम होने का अनुमान लगाया था। जून 2013 की आपदा में इस क्लेम का बड़ा हिस्सा हालांकि जल विद्युत परियोजनाओं और अन्य संपत्ति के नुकसान का था। बीमा कंपनियां यह स्वीकार कर रहीं हैं कि पर्वतीय क्षेत्रों में बीमा कंपनियों की पहुंच न के बराबर है।