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कर्ज का मर्ज : अगले दस साल में उत्तराखंड सरकार को चुकाना है 40 हजार करोड़ रुपये

Mon, 02 Mar 2020 03:55 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • इस बार जितना प्रदेश सरकार का बजट, उतना ही है कर्ज, ब्याज और पुराना कर्ज भुगतने को लेना पड़ रहा है नया कर्ज
  •  कर्ज के केवल 40 प्रतिशत का उपयोग होता है विकास में
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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सरकार के दावों के उलट प्रदेश के लिए लिया जा रहा कर्ज अब मर्ज बनता जा रहा है। हाल यह है कि सरकार को कर्ज का ब्याज भुगतने तक के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। यही वजह है कि कर्ज का केवल 40 प्रतिशत ही विकास योजनाओं के काम आ पा रहा है।

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कर्ज का वैसे तो राज्य के जन्म से ही नाता रहा है। राज्य गठन के समय प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय मात्र 15 हजार रुपये थी। राजस्व भी करीब साढ़े तीन हजार करोड़ था। उद्योग न के बराबर थे। अंतरिम सरकार को इस चुनौती का सामना करना था तो कर्ज एक तरीका ही बच गया था। इसके बाद पूर्व सीएम एनडी तिवारी के कार्यकाल में भी कर्ज से परहेज नहीं किया गया।

2008 में भुवन चंद्र खंडूड़ी मुख्यमंत्री बने तो सरकार का ध्यान कर्ज की ओर गया। इसके बावजूद कर्ज से परहेज नहीं किया गया। इतना जरूर रहा कि 2005 में लागू वित्तीय प्रबंधन अधिनियम के तहत कर्ज को जीडीपी के अनुपात में कम से कम रखने की कोशिश की जाती रही। अब भी प्रदेश में कर्ज मानक से अधिक नहीं है लेकिन इसका आकार बढ़ता ही जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस समय प्रदेश पर करीब 53 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। यह इस बार के कुल बजट के बराबर है।
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अगले दस साल में चुकाने होंगे करीब 40 हजार करोड़ रुपये

प्रदेश को कर्ज का मर्ज किस तरह से परेशान कर सकता है यह कैग की हाल ही में आई रिपोर्ट से भी साबित हो रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश सरकार को अगले दस साल के बकाया 26662 करोड़ रुपये में से 24180 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। इसके साथ ही ब्याज के 15863 करोड़ रुपये भी हैं। यानी सरकार को करीब 40 हजार करोड़ रुपये का भुगतान करना है। 
 

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विकास के लिए सिर्फ 40 प्रतिशत, ब्याज और देनदारी में खप रहा है कर्ज 

प्रदेश सरकार की ओर से लिए गए कर्ज का हिसाब देखा तो यह कर्ज भी प्रदेश की योजनाओं के खाते में कम ही जा रहा है। कैग रिपोर्ट के मुताबिक कर्ज का अधिकतम 40 प्रतिशत ही विकास योजनाओं के काम आ रहा है। बाकी का हिस्सा पूर्व में लिए गए उधार और ब्याज के भुगतान में जा रहा है। साफ यह कि नई संपत्ति न होने से इस कर्ज से सरकार को रिटर्न न के बराबर मिल रहा है। 

कब-कब कितना करना है वापस

वर्ष             ब्याज         मूल
0-1            2171        1464
1-3            4178        2651
3-5            3861        4482
5-7            3370        6233
7-10            2283        9350

राजस्व के मोर्चे पर दोहरी चुनौती 

केंद्र की ओर से जीएसटी में हो रहे नुकसान की भरपाई 2022 तक होगी। प्रदेश सरकार का अनुमान है कि जीएसटी के नुकसान की भरपाई 2025 तक हो जाए तो राज्य को जीएसटी के कारण नुकसान नहीं होगा। इसका कारण यह भी है कि जीएसटी में राज्य का हिस्सा काफी बढ़ चुका होगा। दूसरी ओर, हाल ही में सामने आए आर्थिक सर्वे से यह साफ जाहिर है कि प्रदेश में राजस्व (वेतन, पेंशन, ब्याज, भत्ते) खर्च तेजी से बढ़ रहा है।

यह पाया गया है कि प्रदेश में राजकोषीय घाटे (कुल आय में से कुल खर्च घटाने पर बची राशि, घाटा इसलिए कि खर्च अधिक है और आय कम) में अधिकतर हिस्सा राजस्व खर्च का है। साफ है कि प्रदेश सरकार के सामने राजस्व बढ़ाने, राजस्व खर्च कम करने की दोहरी चुनौती है।
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