उत्तराखंड में चारधाम परियोजना पर काम तेजी से चल रहा है लेकिन मलबे का निस्तारण वैज्ञानिक और नियमों के तहत नहीं किया जा रहा। इस आरोप वाली याचिका पर गौर करने के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्र और राज्य सरकार व संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
याची ने परियोजना प्रस्तावक से समयबद्ध मलबा निस्तारण योजना की भी मांग की है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने गैर सरकारी संस्था कॉमन कॉज की याचिका पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय व उत्तराखंड सरकार को नोटिस दिया है। मामले पर 8 अगस्त को सुनवाई होगी। याचिका में कहा गया है कि चारधाम हाईवे परियोजना के तहत करीब 900 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) होना चाहिए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सभी परियोजनाएं 100 किलोमीटर से कम में बांटकर टुकड़ों में की जा रही हैं। यह इसलिए किया जा रहा है कि पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) से बचा जा सके। याची ने मांग की है कि चारधाम परियोजना को 900 किलोमीटर की पूरी एक परियोजना ही माना जाना चाहिए। याची की ओर से पेश एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने अपनी दलील में कहा कि चारधाम को जोड़ने वाली यह परियोजना पर्यावरण मंजूरी का उल्लंघन कर की जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग 108 के पास तेजी से काम चल रहा है जिसका मलबा ढलान पर ही फेंक दिया जा रहा है जो कि सीधा नदी में पहुंच रहा है। मानसून के समय में ऐसा काम एक बड़ी तबाही को न्यौता दे सकता है।