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इस पद पर UP ने खत्म किया इंटरव्यू, उत्तराखंड पुरानी राह पर

Tue, 15 Sep 2015 01:45 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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साक्षात्कार के माध्यम से उप-निरीक्षक से निरीक्षक बनने की पहेली समझ से परे है। उत्तराखंड के पचास से ज्यादा विभागों में पुलिस निरीक्षक विभागीय पदोन्नति का एकमात्र पद है जिसे साक्षात्कार से भरा जाता है।
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सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद यूपी सरकार साक्षात्कार के प्रक्रिया को 2005 में खत्म कर चुका है, लेकिन उत्तराखंड अभी भी पुरानी लकीर पीट रहा है। यही वजह है कि मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया है।

राज्य में अभी भी यूपी के रूल्स एंड रेगूलेशन लागू है। यूपी ने नियमों में परिवर्तन कर उप-निरीक्षक से निरीक्षक बनने के लिए साक्षात्कार केबजाय ज्येष्ठता व श्रेष्ठता का फार्मूला लागू कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने उसी वक्त विभागीय पदोन्नति के पदों पर नियुक्ति के लिए साक्षात्कार के बजाय ज्येष्ठता व श्रेष्ठता को आधार बनाने को कहा।
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ज्येष्ठता यानि अपने बैच में सीनियर। श्रेष्ठता यानि सर्विस ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर होना। उत्तराखंड ने यूपी के रूल्स रेगूलेशन लागू तो किए, लेकिन वहां किए गए संशोधन को लागू नहीं किया।

यही वजह है कि उच्च न्यायालय की शरण में जाने वाले उप-निरीक्षकों ने यूपी को इस बाबत जारी हुए शासनादेश को बड़ा आधार बनाया है। इसके उलट उत्तराखंड अभी भी पुरानी परिपाटी पर ही है।

वैसे भी तर्कसंगत बात यह है कि राज्य सरकार के पचास से भी ज्यादा विभागों में पुलिस निरीक्षक एकमात्र ऐसा पद है जिस पर साक्षात्कार केबाद पदोन्नति दी जाती है। वर्ना, पदोन्नति का केवल एक ही फार्मूला ज्येष्ठता व श्रेष्ठता का ही है।

चहेतों को प्रमोट करने की गुंजाइश रहती है साक्षात्कार पद्धति में पिछली बार भी जब करीब दो वर्ष पहले उप-निरीक्षकों को साक्षात्कार लेकर पुलिस निरीक्षक बनाया गया तो तमाम सवाल खडे़ हुए। कुछ दरोगाओं का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार था, लेकिन साक्षात्कार में कम अंक दे दिए गए।

कुछ का ट्रैक रिकॉर्ड संतोषनजक था, लेकिन साक्षात्कार में बम्पर नंबर दे दिए गए। यही वजह है कि इस प्रणाली में चेहरे देखकर भी पदोन्नति दिए जाने की संभावना रहती है, लेकिन ज्येष्ठता व श्रेष्ठता वाली पद्धति में ऐसा करने की गुंजाइश कम ही रहती है।

मैं क्षेत्र में हूं, देहरादून पहुंचकर मामले का संज्ञान लूंगा और अधिकारियों से बात करुंगा कि इस मुद्दे पर पारदर्शी तरीके से क्या समाधान हो सकता है। यह सच है कि यही एकमात्र पद है जिस पर साक्षात्कार केबाद पदोन्नति होती है।
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- प्रीतम सिंह, गृहमंत्री
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