त्रिवेंद्र सरकार का वित्तीय प्रबंधन अगले चार साल के दौरान वेतन, पेंशन और ब्याज के बढ़ते खर्च की अग्नि परीक्षा से गुजरेगा।
यदि सरकार ने बढ़ते खर्च के सापेक्ष आमदनी में इजाफा नहीं किया तो राज्य के सामने एक गंभीर वित्तीय संकट पैदा हो जाएगा। नियंत्रक-महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के आंकड़े इस संकट के संकेत दे रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि अगले तीन वर्ष में केवल लोकसेवकों के वेतन का खर्च 15785 करोड़ रुपये तक जा पहुंचेगा। रिपोर्ट में दर्ज संकेतों से प्रदेश सरकार के खर्च की जो तस्वीर बन रही है वह आय के सीमित संसाधनों वाले उत्तराखंड सरीखे राज्य को चिंता में डालने वाली है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश सरकार जितनी कमाई करती है, उसका साठ फीसदी से अधिक वह वेतन और पेंशन पर खर्च कर रही है। तीन से चार हजार करोड़ रुपये उसे बाजार से उठाए गए कर्ज के ब्याज की किस्तें चुकाने पर खर्च करने पड़ रहे हैं। सीधी भर्तियों पर नियंत्रण और मितव्ययिता के तमाम उपाय के बावजूद पिछले सात वर्ष के दौरान सरकारें वेतन और पेंशन खर्च पर कुल राजस्व प्राप्ति के सापेक्ष महज पांच फीसदी की कमी ला पाए हैं। वर्ष 2015-16 में आमदनी की तुलना में वेतन, पेंशन और ब्याज का खर्च 67.27 फीसदी था, जो 2018-19 में 64.04 फीसदी है। एक अनुमान के अनुसार, 2020-21 तक तीनों मदों का कुल 27954 करोड़ तक पहुंच जाएगा जो कुल राजस्व प्राप्ति का 61.87 फीसदी होगा।
सरकार खुद के संसाधनों से आय बढ़ाने के लगातार नए उपाय कर रही है, जिसमें उसे सफलता मिल रही है। आबकारी, खनन और आय के अन्य संसाधनों में ईं टेंडरिंग की प्रक्रिया से आने वाले समय में राजस्व प्राप्तियों में बड़ा सुधार दिखाई देगा।
- प्रकाश पंत, वित्तमंत्री
कुछ यूं उठता जाएगा खर्च का पहाड़
मद- 2017-18 - 2018-19 2019-20 - 2020-21
वेतन- 11859- 13045 - 14350 - 15,785
पेंशन- 4272- 4699 - 5,169 - 5688
ब्याज- 4,409- 5033 - 5719 - 6482
-61.87 फीसदी के करीब है कमाई के सापेक्ष वेतन पेंशन और ब्याज का खर्च
-20541 करोड़ रुपये वेतन, पेंशन और ब्याज पर खर्च हुए पिछले साल
-22,778 करोड़ रुपये खर्च आएगा इस साल वेतन, पेंशन और ब्याज पर
-27,954 करोड़ रुपये हो जाएगा 2020-21 के वेतन पेंशन और ब्याज का खर्च