केदारनाथ आपदा के समय फंसे हुए यात्रियों के लिए संजीवनी बने पौराणिक पैदल मार्गों को अस्तित्व में लाने के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन दल (एसडीआरएफ) की टीम रवाना हो गई है।
ग्लोबल पोजीसनिंग सिस्टम (जीपीएस) से लैस दस सदस्यीय टीम सबसे पहले बाबा केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले इन पैदल मार्गों को खोजेगी। इस दौरान दल पौराणिक मार्ग की विषम स्थिति का आंकलन करने के साथ ही वहां की खूबसूरती को कैमरे में कैद भी करेगा और उसकी ग्राउंड रिपोर्ट भी तैयार करेगा। इस कवायद का मकसद आपदा की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के अलावा पर्यटन को बढ़ावा भी देना है। एसडीआरएफ सेनानायक तृप्ति भट्ट ने बताया कि कपाट खुलने से पहले यह दल पौराणिक मार्ग से पैदल होते हुए केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंच जाएगा।
दशकों पहले जब सड़क मार्ग नहीं थे, तब काली कमली मठ की ओर से नदी के किनारे-किनारे से पैदल मार्गों से चारधाम यात्रा कराई जाती थी। पर समय दर समय हुए भूस्खलन और यात्रा मार्ग की अनदेखी से मार्ग का अस्तित्व खत्म हो गया। वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा के समय एसडीआरएफ को इन मार्गों की सुध आई और इन्हीं मार्गों के जरिए फंसे हुए तीर्थ यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। हालांकि ऋषिकेश से लेकर बद्रीनाथ और केदारनाथ तक सदियों पुराने पैदल मार्गों को खोजना किसी चुनौती से कम नहीं है।
इस चुनौती से पार पाने का बीड़ा एसडीआरएफ की दस सदस्यीय टीम ने उठाया है। ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला से यह दल पैदल रवाना हुआ है। इसका नेतृत्व में इंस्पेक्टर संजय उप्रेती कर रहे है। दल में दो महिलाएं भी शामिल है। एसडीआरएफ सेनानायक तृप्ति भट्ट लगातार दल के संपर्क में है। एसडीआरएफ का यह दल पौराणिक मार्ग की स्थिति का अवलोकन करने के साथ ही रास्ते में आने वाले मंदिरों, धर्मशालाओं, चट्टियों आदि का अभिलेखीकरण भी करेगा। रुद्रप्रयाग से यह दल विभाजित हो जाएगा। यहां से पांच-पांच सदस्य केदारनाथ और बद्रीनाथ के लिए रवाना हाेंगे।
यात्रा का मुख्य उद्देश्य चार धाम पैदल मार्गों में व्यवस्थित करने के शंकराचार्य कालीन चट्टियों को पुर्नजीवित करने, ट्रेक रूटों को विकसित कर पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ विषम परिस्थितियों में वैकल्पिक मार्ग की खोज भी करना है।
- अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था
टीम में शामिल सदस्य
एसडीआरएफ टीम में निरीक्षक संजय उप्रेती, फायरमैन रोशन कोठारी, फायरमैन नितेश खेतवाल, महिला कांस्टेबल रेखा नायक, प्रीति मल्ल, कांस्टेबल दिगंबर, दीपक पंत, राजेश कुमार, दीपक नेगी, लक्ष्मण सिंह, महेशचंद्र चंद्र, टेक्नीशियन अंकित पाल, पैरामेडिक्स संजय चौहान और मुकेश सिंह शामिल है।
कितने दिन में पूरी करेंगे यात्रा
एक अनुमान के मुताबिक ऋषिकेश से केदारनाथ धाम की दूरी 250 से 280 किलोमीटर, जबकि बद्रीनाथ से दूरी 300 किमी के करीब है। ऐसे में एसडीआरएफ की टीम रोजाना 25 से 30 किलोमीटर की यात्रा करेगी। इस लिहाज से सात मई को शुरू होने वाली चारधाम यात्रा से पहले दल केदारनाथ और बद्रीनाथ पहुंच जाएगा।