करीब ढाई हजार करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट के बाद अब प्रदेश सरकार राजकोषीय घाटे की हदबंदी में भी जुट गई है। प्रदेश के बजट पर फर्क न पड़े और काम भी निकालने के लिए सरकार ने आकस्मिक निधि से 165.58 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति करना तय किया है और 848 करोड़ रुपये का भार केंद्र सहायतित योजनाओं पर डाला है।
इतना जरूर है कि कर्मचारियों के वेतन, भत्तों को लेकर बजट में लगाया गया अनुमान सही बैठा और अगले चार माह कर्मचारियों के वेतन, भत्तों के लिए धन की व्यवस्था को लेकर सरकार राहत में हैं। प्रदेश सरकार के मूल बजट के हिसाब से राजस्व सरप्लस केवल 22 करोड़ रुपये का है। साफ है कि बजट में 2533 करोड़ की अनुदान मांगों के जुड़ने पर राजस्व सरप्लस नहीं रह पाता।
इसके देखते हुए सरकार ने अनुपूरक बजट में योजनाओं के लिए 848.11 करोड़ रुपये की व्यवस्था केंद्र सहायता योजनाओं के तहत की है। 70 करोड़ रुपये विश्व बैंक या अन्य वित्तीय एजेंसी से मदद से पूरा करना तय किया है। इतना होने पर भी राज्य कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के लिए मूल बजट में की गई व्यवस्था ही सरकार के अब काम आई है। इस मद में करीब 14513.75 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी।
वित्त विभाग के मुताबिक अक्तूबर तक 8306.71 करोड़ रुपये खर्च हुए। अब अनुमान है कि चार माह का वेतन देने के बाद इस मद में पैसे बचेंगे। इसके अलावा आकस्मिक निधि से भी सरकार ने 165.58 करोड़ रुपये लिए हैं। इस निधि से लिए गए पैसों की भरपाई बाद में सरकार को करनी होगी। उत्तराखंड के महालेखाकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अक्तूबर माह तक सरकार को 10605 करोड़ रुपये का राजस्व और नॉन टैक्स राजस्व 2147 करोड़ हासिल हुआ।
क्या किया था मूल बजट में...
आय - 45787 करोड़ रुपये
व्यय - 45704 करोड़ रुपये
राजकोषीय घाटा - 6798 करोड़ रुपये
अनुपूरक बजट - 2533 करोड़ रुपये