विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए कि वह राज्य आंदोलनकारियों के हितों के संबंध में स्पष्ट नीति की अधिसूचना जारी करे। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने यह निर्देश सदन में कार्यस्थगन प्रस्ताव पर सरकार का उत्तर आने के बाद दिए। सरकार ने कहा कि आंदोलनकारी के कॉरपस फंड की धनराशि कोषागार के माध्यम से होगी।
इससे पूर्व कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने राज्य आंदोलनकारियों के मसले पर चिंता जाहिर की कि 18 साल बाद भी चिन्हीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। उन्हें क्षैतिज आरक्षण का लाभ भी नहीं मिल रहा। उन्होंने आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की कट ऑफ डेट तय करने और उन्हें राज्य निर्माण सेनानी घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी की तरह राज्य आंदोलनकारियों को भी एक समान पेंशन दी जाए और उन्हें पेंशन पट्टा जारी किया जाए।
इस पर संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि न्यायालय ने राज्य आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण की समीक्षा की। न्यायालय ने इसे स्वीकार नहीं किया। वर्तमान में सरकार मार्ग निकालने के लिए इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की अंतिम तिथि 31 मार्च 2014 थी, जिसे समय-समय बढ़ाया जाता रहा। सीएम ने संज्ञान लिया और उसे 31 दिसंबर 2017 तक बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपनों को खो दिया, उनकी और सामान्य श्रेणी पेंशन को समान रखना उचित नहीं है। इसके बाद स्पीकर ने पीठ से सरकार को निर्देश दिए।
क्या है स्थिति
-प्रदेश में11536 चिन्हित आंदोलनकारी है।
-594 सरकारी नौकरी पर हैं और 7705 पेंशनभोगी
-कॉरपस फंड से भुगतान कोषागार के माध्यम से जारी होगा