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उत्तराखंड सरकार की लापरवाही से मुश्किल में जान

Sun, 07 Feb 2016 01:17 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड सरकार की लापरवाही से दूरस्थ क्षेत्रों में मरीजों की जान मुश्किल में है।
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सरकार ने पीपीपी मोड में चलने वाले अस्पतालों पर ताला लगा दिया, लेकिन ऐसा करने से पहले कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। हालत यह है कि चार में से तीन अस्पतालों में लोगों को सिरदर्द और बुखार तक की दवा तक नहीं मिल रही है। लोगों को खांसी-जुकाम की दवा लेने तक के लिए दूसरे क्षेत्रों के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

प्रदेश सरकार ने दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने के नाम पर एक दर्जन सरकारी अस्पतालों को पीपीपी मोड पर दिया था। इसमें गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के छह-छह अस्पताल शामिल हैं। गढ़वाल के रायपुर, साहिया, थत्यूड़ और नौगांव अस्पतालों को राजभ्रा मेडिकेयर कंपनी को दिया गया।
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जबकि गढ़वाल के ही गैरसैंण, जखोली और कुमाऊं के मुनस्यारी, लोहाघाट, बाजपुर, कपकोट, गरमपानी, चौखुटिया अस्पतालों के संचालन का जिम्मेदारी शील नर्सिंग को दी गई। विभिन्न अनियमितताओं के चलते सरकार ने राजभ्रा मेडिकेयर का अनुबंध निरस्त कर दिया और करीब एक माह पूर्व चारों अस्पताल वापस ले लिए।

इन अस्पतालों में अभी तक पीपीपी मोड की कंपनी का स्टाफ तैनात था। कंपनी के हटने के बाद स्टाफ भी नहीं रहा। उसके बाद से चारों अस्पतालों की व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। रायपुर में व्यवस्था के तौर पर दो चिकित्सक भेजे जा रहे हैं, लेकिन जांच व अन्य उपचार ठप है। अन्य तीनों अस्पतालों में लोगों को सामान्य बीमारियों का उपचार भी नहीं मिल पा रहा है।
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सीएमओ कार्यालय से मैंने इस संबंध में जानकारी मांगी थी। मुझे बताया गया है कि चारों अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर स्टाफ की तैनाती की गई है। रोगियों को बेहतर उपचार और स्वास्थ्य सेवा देने को व्यवस्था बनाई जा रही है।
- डा. कुसुम नरियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक
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