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दो साल में सरकार की 14 अर्जियों पर चली सीबीआई की मर्जी

Sun, 11 Jun 2017 03:29 PM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला,देहरादून
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CM trivendra singh rawat
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एनएच-74 घोटाले की सीबीआई जांच की सिफारिश पर अगर कोई सकारात्मक फैसला नहीं आता है, तो यह कोई नई बात नहीं होगी। राज्य सरकार ने बीते दो साल में कुल 13 मामलों की सीबीआई जांच की संस्तुति की, लेकिन एक भी जांच केंद्रीय एजेंसी ने स्वीकार नहीं की। इसमें तमाम गंभीर प्रकरण ऐसे भी हैं, जिन्हें स्वीकार करने या न करने को लेकर आज तक केंद्र से कोई जवाब तक नहीं आया है।
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पश्चिमी यूपी से उत्तराखंड के कुमाऊं इलाके को जोड़ने वाले एनएच-74 के चौड़ीकरण में तीन सौ करोड़ से ज्यादा का घोटाला हुआ है। यह बात पूर्व कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन की प्राथमिक जांच में स्पष्ट भी हो चुकी है। भाजपा सरकार के आस्तित्व में आते ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मामले की गंभीरता को देखते तमाम अधिकारियों को निलंबित किया। साथ ही भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करते हुए घोटाले की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी।

दो महीने से ज्यादा बीतने के बावजूद सीबीआई ने इस मामले पर कोई फैसला नहीं लिया है, जबकि सरकार की ओर से दो बार रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की चिट्ठी ने सरकार में खलबली मचा दी, जिसमें उन्होंने जांच से एनएच अफसरों के मनोबल पर असर पड़ने की बात कह डाली। यह भी कहा कि इस जांच के संबंध में दोबारा फैसला न लिया गया तो उत्तराखंड में एनएच की ओर से संचालित योजनाओं पर असर पड़ेगा।
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इस पत्र को विपक्ष ने मुद्दा बनाकर विधानसभा सत्र के दौरान भी सरकार पर जमकर हमले किए। बहरहाल सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि जल्द ही सीबीआई इसे टेकअप करेगी और अपने स्तर से पूरे मामले में कार्रवाई करेगी। खैर, जो भी हो मगर इस मामले में पुराना रिकार्ड बेहद खराब है। बीते दो साल के भीतर सीबीआई को कुल 13 मामलों में जांच करने की सिफारिश राज्य सरकार ने भेजी, जिसमें से एक भी जांच सीबीआई के स्तर पर स्वीकार नहीं की गई। देहरादून के तीन मामलों के अलावा नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, पौढ़ी, टिहरी के मामले हैं। ऐसे में एनएच घपले की जांच को लेकर कयास लगाया जा सकता है।
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ये हैं चर्चित मामले जो सीबीआई को गए

सीबीआई - फोटो : DEMO Pics
खुड़बुड़ा के रहने वाले राजेश जैन को जहर देकर मारने के आरोप में दर्ज हुए एक मामले को 31 अगस्त 2016 को सीबीआई जांच के लिए भेजा गया था। हत्या के पीछे तमाम पहलू थे, जिसमें पुलिस को कातिलों तक पहुंचने में सफलता नहीं मिली। पीड़ित पक्ष के अनुरोध पर राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश हुई, मगर सीबीआई ने जांच करने से इंकार कर दिया।

हरिद्वार के पथरी थाना क्षेत्र के ग्राम बुक्कनपुर में वर्ष 2011 में आनंद कुमार की गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के पिता श्यामचंद पुत्र धूमसिंह की ओर से हत्या का मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराया गया था। थाना पुलिस के स्तर से मामले में कुछ नहीं निकला तो राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की, मगर आज तक सीबीआई की ओर से कोई जवाब नहीं आया।

शिवपुरी राफ्टिंग कैंप से पांच साल पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता दिल्ली के पटेल नगर निवासी सुगंधा (25) का काफी खोजबीन के बाद भी पता नहीं चला। पुलिस ने एक महीने मुनि की रेती थाने में गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम कर दिया गया। युवती की बरामदगी में पुलिस के नाकाम होने पर मामले की जांच 20 जून 2015 को सीबीआई को भेज दिया गया।

चार साल पूर्व हल्द्वानी के ओम विहार डहरिया निवासी नितिन टम्टा अपने दोस्तों के साथ अमृतपुर की तरफ नदी में नहाने गया था। जहां उसकी डूबकर मौत हो गई थी। नितिन के परिजनों ने दोस्तों पर हत्या करने का आरोप लगाया था। मगर पुलिस ने एफआर लगा दी थी। बाद में राज्य सरकार ने 31 जनवरी 2016 को सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश की थी।

काशीपुर में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र मानस निवासी ओझान के छोटे पुत्र राघवेंद्र सिंह (27) की  22 नबंवर 2015 की रात हत्या कर शव रामनगर रेलवे क्रॉसिंग के निकट रेलवे लाइन किनारे फेंक दिया गया। मानस पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं हुए तो राज्य की ओर से दो सितंबर 2016 को सीबीआई जांच की सिफारिश की गई। सीबीआई ने जांच लेने से इंकार कर दिया।
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