यही गजब का आत्मविश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर साफ दिखाई दिया। उन्होंने जिस भरोसे के साथ अपने नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था को दुनिया में शिखर की ओर से ले जाने का इरादा जताया, उसने जाहिर कर दिया कि वह फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होने जा रहे हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी का यह इरादा अनायास नहीं है। दरअसल, जिन कल्याणकारी और विकास नीतियों और विजन पर केंद्र सरकार काम कर रही है, उसने स्थिर सरकार के प्रति विश्वास जताया है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में राजनीतिक स्थिरता का प्रमुखता से जिक्र भी किया। इसके लिए उन्होंने विधानसभा चुनाव के हालिया नतीजों का उदाहरण दिया। उनका यह कहना कि आकांक्षी भारत अस्थिरता के बजाय एक स्थिर सरकार चाहता है, का यही निहितार्थ था कि ऐसी स्थितियां विकास और सुशासन का वातावरण बनाने में मददगार साबित होगी।
डबल इंजन सरकारों की खूबिया गिनाई
प्रधानमंत्री ने पिछले करीब 10 वर्षों में उत्तराखंड में चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना, देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे, पंतनगर और देहरादून एयरपोर्ट के विकास और विस्तार का जिक्र करके डबल इंजन की सरकारों के फायदे भी गिनाए। उन्होंने मंच से कहा भी, उत्तराखंड को डबल इंजन का लाभ मिला है और प्रकृति, संस्कृति और विरासत को समेटे उत्तराखंड आज कनेक्टिविटी और विकास योजनाओं के कारण एक ब्रांड के रूप में उभरने जा रहा है। ऐसा कहकर उन्होंने उन राज्यों को भी संदेश साफ कर दिया जहां स्थिर और डबल इंजन की सरकारें नहीं हैं।