चमोली में आपदा के बाद का नजारा
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विष्णुप्रयाग, पीपलकोटी, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग व रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी किनारे मरी मछलियों के ढेर से तबाही का अंदाजा लगाया जा सकता है। भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून की शोधार्थी भावना धवन का कहना है कि अलकनंदा का पानी ठंडा व साफ है, जिस कारण यहां स्नो ट्राउट व महाशीर की संख्या सबसे अधिक है, लेकिन जैसे ही नदी में अधिक वेग से मलबा व पानी पहुंचा तो मछिलयों का दम घुटने लगा और उनकी मौत हो गई। कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग में कई लोगों ने मछलियों को पकड़ा।