इस बीच रास्ते में रोहतांग दर्रा, केलांग, लांगलांगल, बारलाचला, सर्चू, पांग, मोरेडेजर्ट, लेह, नुब्रा घाटी आदि स्थानों से होकर दल आगे बढ़ा। वह बताती हैं कि दल के सदस्य प्रतिदिन करीब चार सौ किमी बाइक चलाते थे। चांग्ला में सड़क टूटी हुई थी। ऐसे में कड़ाके की ठंड में खड़ी चढ़ाई पर बाइक चलाना काफी मुश्किल था, लेकिन दल के लीडर जैक्सन लोचन व अन्य साथी पंकज, मानव, आनंद, आकाश, किशन, प्रशांत व अभिषेक ने हौसला नहीं हारने दिया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सर्चू में तापमान माइनस 2-3 था। इसमें बाइक चलाना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और मंजिल पा ही ली। डीएवी की बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा सुचेता इससे पहले बाइक से औली, हर्षिल, धर्मशाला जा चुकी हैं। उन्हें ट्रैकिंग का भी काफी शौक है। वह चंगबंग पीक व फूलों की घाटी भी जा चुकी हैं। वह बताती हैं कि अब उनका अगला लक्ष्य कश्मीर से कन्याकुमारी तक बाइक से सफर करने का है।
18380 फीट ऊंचा है खारदुंग ला दर्रा
खारदुंग ला दर्रा हिमालय स्थित एक दर्रा है। यह समुद्र तल से लगभग 5602 मीटर (18,380 फ ीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यह परिवहन योग्य भारत और संभवत: विश्व का सबसे ऊंचा दर्रा है लेकिन इसकी ऊंचाई विवादित भी है। यह दर्रा मध्य एशिया में कशगर को लेह से जोड़ने वाला ऐतिहासिक मार्ग भी है।