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वन भूमि पर केंद्र ने बढ़ाए उत्तराखंड के अधिकार

Sat, 10 Jan 2015 06:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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वन भूमि हस्तांतरण के मामले में केंद्र के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के भूमि हस्तांतरण के उत्तराखंड स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकार बढ़ा दिए हैं। अब 40 हेक्टेयर क्षेत्रफल तक की भूमि पर किसी तरह के प्रोजेक्ट के लिए केंद्र के चक्कर नहीं लगाने होंगे।
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अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न प्रोजेक्ट के लिए वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल कर दी है। राज्य में वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित मामलों के लिए एक और मंडल कार्यालय कुमाऊं में भी खोला जाएगा।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि अब 40 हेक्टेयर क्षेत्रफल तक के प्रोजेक्ट के लिए केंद्र के बजाय देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय मंजूरी देगा। अभी तक यह अधिकार 05 हेक्टेयर तक ही था। हालांकि इसमें सड़क, सिंचाई व रेलवे समेत अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं। शर्मा ने बताया कि केंद्र के इस निर्णय से रुके प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में तेजी आएगी।
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इसी क्रम में रायपुर में प्रस्तावित विधानसभा व सचिवालय भवन के लिए वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी इसी महीने मिल जाएगी।
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वन्यजीव विहार के नजदीक प्रोजेक्ट का दायरा कम

जौलीग्रांट एयरपोर्ट से सहस्त्रधारा तक प्रस्तावित फास्ट ट्रैक रोड को भी इसी महीने मंजूरी मिलेगी। यह मार्ग कुल 21 किमी लंबा है। इसे केंद्र की मदद से बनाया जाएगा। दस किमी लंबाई तक फोर लेन व बाकी दो लेन मार्ग होगा। यह मार्ग टोल-फ्री होगा। इसमें हाथियों के लिए दो गलियारे (कॉरिडोर) भी बनेंगे।

इस सड़क के बनने के बाद देहरादून शहर की ट्रैफिक जाम की दिक्कत खत्म हो जाएगी। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन बिछाने में भी फैसले से मदद मिलेगी।

केंद्र ने एक राहत और दी है। अभी तक किसी भी वन्य जीव विहार से दस किमी की दूरी तक किसी भी प्रोजेक्ट के लिए केंद्र से अनुमति लेनी होती थी। लेकिन अब इस सीमा को कम करके केंद्र ने पांच किलोमीटर कर दिया है। इससे आसन बैराज, हरिद्वार आदि स्थानों पर रुके हुए प्रोजेक्ट शुरू हो सकेंगे।
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