अर्थव्यवस्था के आकार में यह कमी अब प्रदेश सरकार को चिंतित भी कर सकती है। कारण यह भी है कि अर्थव्यवस्था में गिरावट ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है। प्रदेश में खेती किसानी या प्रारंभिक क्षेत्र की विकास दर पहले से ही चार प्रतिशत से कम थी।
ऐसे में यह भी साफ है कि प्रदेश सरकार के सामने अब प्रवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने वाली योजनाओं को बेहतर तरीके से धरातल पर उतारने का अधिक दबाव रहेगा। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार को अधिक मेहनत भी करनी होगी। वहीं, शहरी क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था का आकार कम होने का मतलब रोजगार को लेकर दबाव बढ़ना भी माना जा रहा है।